देवी अन्नपूर्णा

देवी अन्नपूर्णा हिन्दू धर्म की देवी हैं। देवी अन्नपूर्णा को धन, वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इन्हें “अन्न की पूर्ति“ करने वाली देवी कहा गया है। मान्यता है कि देवी अन्नपूर्णा भक्तों की भूख शांत करती हैं तथा जो इनकी आराधना करता है उसके घर में कभी भी अनाज की कमी नहीं होती है। हिन्दू ग्रंथों और पुराणों में कई बार मां अन्नपूर्णा का विवरण आया है। देवी अन्नपूर्णा से जुड़ी रोचक बातें निम्न हैं:


1. वेदों में लिखा है कि लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व श्रीराम जी ने अपनी वानर सेना की भूख मिटाने के लिए देवी अन्नपूर्णा की पूजा की थी, जिसके बाद देवी ने सेनाओं की भूख को शांत किया था और विजय प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था।

2. ग्रंथों के अनुसार काशी में जब अन्न की भारी कमी आ गई थी, तब इस स्थिति से परेशान होकर शंकर भगवान ने देवी अन्नपूर्णा से भिक्षा ग्रहण किया था।

देवी अन्नपूर्णा का रूप (Details of Annapoorana Devi)

स्कंद पुराण के अनुसार देवी अन्नपूर्णा के तीन नेत्र हैं। इनके माथे पर अर्द्धचन्द्र बना है। मां अनेकों आभूषण धारण किये हुए हैं। देवी अन्नपूर्णा के एक हाथ में बर्तन और दूसरे में अन्न से भरा घड़ा है। जिस तरह लक्ष्मी जी को धन और वैभव की देवी माना जाता है, उसी प्रकार देवी अन्नपूर्णा भोजन की देवी मानी जाती हैं।

अन्नपूर्णा देवी मंत्र (Annapoorana Devi Mantra)

हिन्दू धर्मानुसार देवी अन्नपूर्णा की आराधना विभिन्न तरीकों से की जाती है। देवी अन्नपूर्णा की पूजा में निम्न मंत्र का विशेष महत्त्व है:

ऊं अन्नपूर्णे सदापूरणे

शंकरः प्राणवल्लभे ज्ञान-वैराग्य-सिध्यर्द्हम भिक्षाम देहि च पार्वती।।

काशी में बसती हैं देवी अन्नपूर्णा (Devi Annapurna in Kashi)

स्कंद पुराण के काशी खंड में इस बात का वर्णन किया गया है कि भगवान शिव की भार्या देवी पार्वती ही अन्नपूर्णा देवी हैं। काशी में ही अन्नपूर्णा देवीपीठ भी है। मान्यता है कि अन्नपूर्णा देवी की कृपा से मनुष्य के जीवन में कभी भी खाने आदि की समस्या नहीं होती।

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