ओणम 2016

ओणम, केरल का प्रमुख त्यौहार है। मलयालम कैलेण्डर के अनुसार, चिंगम महीने में थिरुवोणम नक्षत्र होने पर यह त्यौहार मनाया जाता है। वर्ष 2017 में ओणम 04 सितंबर (Onam 2017) को मनाया जाएगा।

ओणम की कहानी (Story of Onam in Hindi) 

केरल में ओणम उनके प्रिय राजा महाबलि की याद में मनाया जाता है। ओणम की कहानी (Story of Onam) भगवान विष्णु और उनके वामन अवतार से जुड़ी है। लोक मान्यताओं और वामन पुराण के अनुसार केरल में एक महाप्रतापी राजा हुआ करता था जिसका नाम था बलि। राक्षस जाति के होने के बावजूद राजा अपनी प्रजा के लिए काफी प्रतिबद्ध थे। राजा बलि के सुशासन से देवता काफी ईष्या करने लगे। राजा बलि से ईर्ष्या कर देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता करने का आग्रह किया। 

देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान श्री विष्णु ने वामन अवतार लिया। एक दिन वामन बलि की सभा में पहुंचे। महाबलि ने उनसे स्वागत किया और उनसे मनचाही वस्तु मांगने को कहा। 

वामन जी ने राजा से दान में तीन पग भूमि मांग ली। दानवीर राजा महा बलि ने यह स्वीकार कर लिया। किन्तु जैसे ही महाबलि ने यह भेंट श्री वामन को दी, वामन का आकार एकाएक बढ़ता ही चला गया। वामन ने तब एक कदम से पूरी पृथ्वी को ही नाप डाला तथा दूसरे कदम से आकाश को। अब तीसरा कदम तो रखने को स्थान बचा ही नहीं था। तब राजा बलि ने कहा कि आप मेरे सिर पर पैर रखें। ऐसा सुनकर वामन भगवान ने पैर रखकर राजा को पाताल भेज दिया। 

चूंकि राजा बलि की प्रजा उससे बहुत ही स्नेह रखती थी, इसीलिए श्रीविष्णु ने बलि को वरदान दिया कि वह अपनी प्रजा को वर्ष में एक बार अवश्य मिल सकेगा। अतः जिस दिन महाबलि केरल आते हैं, वही दिन ओणम के रूप में मनाया जाता है। इस त्यौहार को केरल के सभी धर्मों के लोग मनाते हैं। कई लोग इस त्यौहार को कृषि से जोड़कर भी देखते हैं।
 
कैसे मनाया जाता है ओणम (Rituals of Onam)
दस दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार में पहला और आखिरी दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस पर्व के दौरान एक विशेष नौका दौड़ का भी आयोजन किया जाता है। ओणम के दौरान महिलाएं घर में फूलों की रंगोली बनाती हैं। ओणम त्यौहार का एक और खास आकर्षण इस दिन बनने वाले विशेष व्यंजन भी होते हैं।    

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