गणेशोत्सव

गणेशोत्सव हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की सबसे अधिक धूम देखने को मिलती है। यह पर्व महाराष्ट्र का प्रतीक बन चुका है। इसे गणेश महोत्सव भी कहा जाता है। इस दौरान प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा की जाती है। यह त्यौहार (Ganesh Utsav 2017) पूरे 10 दिनों तक बड़े धूम- धाम से मनाया जाता है।

गणेशोत्सव 2017 (Ganesh Utsav 2017)

गणेशोत्सव (Ganesh Utsav) का त्यौहार वैसे को पूरे भारत देश में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।  इस साल गणेश उत्सव 25 अगस्त से 05 सितंबर तक चलेगा। 

गणेशोत्सव से जुड़ी पौराणिक कथा (Ganesh Utsav Katha)

नारद पुराण की एक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक बालक की जीवंत मूर्ति बनाई। इसके बाद उन्होंने उस बालक का नाम गणेश रखा तथा उसे द्वार पर "यह कहकर खड़ा कर दिया की 'मैं स्नान करने जा रही हूं' वह इस बीच किसी को अंदर न आने दे"।

उन्होंने माता की आज्ञा का पालन करते हुए जब भगवान शिव को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया, तो क्रोध में आकर शिव जी ने बालक का गला धड़ से अलग कर दिया। जब माता पार्वती को यह बात पता चली तो वह विलाप करने लगीं।

इसके बाद भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर उस बालक के शरीर में जोड़कर उसे पुनः जीवित कर दिया। उसी दिन को भगवान श्री गणेश के जन्म उत्सव के रूप में आज मनाया जाता है।

गणेश प्रतिमा की स्थापना (Vindication of Ganesh Statue)

गणेश उत्सव के प्रथम दिन लोग गणेशजी की मूर्तियों की अपने घरों में स्थापित करते हैं। इसके उपरांत दस दिनों तक भगवान की पूरे विधि-विधान से पूजा करके उनसे सुख- शांति, समृद्धि आदि

मंगलकामना करते हैं। इस दौरान महाराष्ट्र में भगवान गणेश की मंगलमूर्ति, गणपति और सिद्धीविनायक आदि नाम से पूजा की जाती है। पूजा की समाप्ति पर मूर्ति विसर्जन किया जाता है।

गणेश उत्सव पूजा विधि (Ganesh Utsav Puja Vidhi)

गणेश उत्सव के पहले दिन प्रातः स्नान कर 'मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये' का जाप करते हुए शक्तिनुसार सोने, तांबे, मिट्टी या गोबर की गणेश प्रतिमा बनानी चाहिए। जल भरे हुए

कलश पर कपड़ा बांधकर गणेश प्रतिमा को उस पर स्थापित कर, सिंदूर चढ़ते हुए उनकी आरती करनी चाहिए।

इसके बाद भगवान को 21 मोदक का भोग लगाते हुए 5 मोदक गणेश जी के पास रखें तथा बचे हुए मोदक को ब्राह्मण को दान कर दें। इसी प्रकार दस दिन तक फूल, धूप, दीप, कपूर, रोली, चंदन, मोदक,

दूर्वा आदि से गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय तुलसी पत्तों का प्रयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए।

गणेश प्रतिमा का विसर्जन (Ganesh Visarjan Muhurat)

इस प्रकार दस दिन तक श्रद्धाभाव से गणेश पूजन करने के बाद ग्यारहवें दिन गणेश मूर्ति का विसर्जन नदी, तालाब या समुद्र में बड़े धूम- धाम से किया जाता है। इस उत्सव के दौरान की जाने वाली गणेशजी की महाआरती और पुष्पांजलि का अद्भुत नजारा मन को मोह लेता है।

गणेश उत्सव की मान्यता (Assumption of Ganesh Utsav)

मान्यतानुसार जो व्यक्ति दस दिनों तक श्रद्धाभाव एवं विधि-विधान से भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है। विघ्नहर्ता श्री गणेश अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते है तथा उन पर सौभाग्य, समृद्धि और सुखों की वर्षा करते हैं।

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