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बाइबलBible

बाइबल (Bible)

बाइबल को ईसाई धर्म की सबसे पवित्र पुस्तक माना जाता है। यह दो भागों में विभाजित है: पूर्वविधान और नवविधान।

पूर्वविधान या पुराना नियम (Old Testament in Hindi)

पूर्वविधान में यहूदियों के विषय में अधिक बातें लिखी गई हैं। बाइबल के इस भाग में कई कहानियों का जिक्र हैं। इन कहानियों में मुख्य हैं - आदम और हव्वा, कैन और हाबिल की कहानियां।

नवविधान या नया नियम (New Testament in Hindi)

नवविधान में प्रभु ईसा मसीह के जीवन का वर्णन किया गया है। इसमें ईसा मसीह के व्यक्तित्व, चमत्कारों, शिक्षा, मरण तथा पुनरुत्थान आदि का वर्णन है। साथ ही इस भाग में यह संदेश दिया गया है कि मनुष्य ईसा मसीह द्वारा दिखाए गए मार्ग को अपना कर अपना जीवन सुधार सकता है।

बाइबिल का विषय (Main Subject of Bible in Hindi)

ईसाई धर्म की इस पवित्र पुस्तक का मुख्य संदेश और विषय मानव जाति का कल्याण है। आध्यात्म की राह पर चलते हुए किस प्रकार मनुष्य अपना जीवन श्रेष्ठ बना सकता है, यही बाइबल की सीख है। ईसा मसीह जिन्हें परमेश्वर का पुत्र माना गया है, उन्होंने जन्म लेने के लिए अस्तबल जैसी जगह चुनकर लोगों के बीच फैली असमानता को दूर करने का प्रयास किया। मरते समय भी ईसा मसीह सत्य की राह पर कुर्बान होने की सीख दे गए।

बाइबल में कई अन्य पात्र भी महत्त्वपूर्ण हैं जैसे मुसा, यहोवा आदि। बाइबल की सबसे मुख्य बात है यह कि इसे नियमों की किताब भी कहा जाता है। एक आदर्श जीवन जीने के लिए किन नियमों का पालन करना चाहिए, यह बाइबिल में वर्णित है।

बाइबल के नियम (Laws of Bible in Hindi)

माना जाता है कि बाइबल सिर्फ पढ़ने की ही नहीं बल्कि जीवन में इसकी सीखों को उतारने की वस्तु है। हालांकि अन्य धर्म ग्रंथों की तरह इसे भी पढ़ने के कुछ नियम हैं जो निम्न है:

* बाइबल पढ़ते समय मन में ईश्वर पर पूरी तरह विश्वास होना चाहिए।
* मुख्य पर्वों के दौरान बाइबल के कुछ पाठों को अवश्य पढ़ना चाहिए।

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