ईसा मसीह

ईसा मसीह ईसाई धर्म के भगवान माने जाते हैं। ईसा मसीह द्वारा शुरू किया गया ईसाई धर्म आज दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बन चुका है। ईसाई धर्म के ग्रंथ बाइबल में "यीशु मसीह" नाम का वर्णन है, हालांकि अधिकतर लोग इन्हें ईसा मसीह ही कहते हैं। 

ईसा मसीह की जन्म कथा (Jesus' birth story in Hindi)

बाइबल के अनुसार एक बार रोमन के नाज़रेथ गाँव में रहने वाली मैरी नामक लड़की के पास ईश्वर का एक दूत आया। उस दूत ने मैरी को बताया कि “तुम ईश्वर के पुत्र को जन्म दोगी। इसके साथ ही यह भी कहा कि उस बच्चे का नाम जीसस होगा।”

दूत की बात सुनकर मैरी ने उससे कहा कि “मैं एक कुंआरी लड़की हूं मैं किसी पुत्र को कैसे जन्म दे सकती हूं"। इसका जवाब देते हुए कहा “एक पवित्र आत्मा आकर उसे ईश्वरीय शक्तियों से संपन्न करेगा। इसके बाद मैरी से एक जोसेफ नाम के युवक ने ईश्वर के आदेश पर विवाह कर लिया। विवाह के बाद मैरी और जोसेफ बैथेलहम चले गए। परंतु वहां उनको रहने के लिए कोई पर्याप्त स्थान नहीं मिला।

मैरी और जोसेफ काफी देर तक इधर-उधर भटकते रहे और अंत में थक कर एक अस्तबल में जा पहुंचे। दोनों ने वही रात गुजरने का फैसला किया। उसी दिन आधी रात को प्रभु यीशु का जन्म हुआ। ईसाई धर्म का सबसे बड़ा पर्व क्रिसमस है जिसे ईसा मसीह के जन्मदिन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसमें लोग प्रभु यीशु से सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं तथा अपने गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं।

ईसा मसीह की मुख्य शिक्षाएं (Teachings of Lord Jesus in Hindi)

मानवता से प्रेम करना ही प्रभु ईसा मसीह का सबसे बड़ा संदेश था। ईसा मसीह ने जीवन भर जिस संदेश को लोगों तक पहुंचाना चाहा उसमें से एक प्रमुख संदेश था लोगों को माफ करने का। अपनी मृत्यु के समय भी ईसा मसीह से भगवान से प्रार्थना कि हे ईश्वर, इन्हें (मेरे हत्यारों को) माफ करना क्योंकि यह नहीं जानते कि यह क्या कर रहे हैं?

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