जानिए ईसाई धर्म को

ईसाई धर्म (Christianity) दुनिया में सबसे अधिक माने जाना वाला धर्म है। ईसा मसीह के कथनों पर अमल करने वाले इस धर्म का इतिहास रोचक घटनाओं और प्रेरक संदेशों से भरा है। अपने वर्चस्व के लिए इस धर्म ने कई यातनाएं सही और आज दुनिया के सबसे अधिक माने जाने वाले धर्मों में से एक बना है। मानवता को सर्वोच्च मानने वाले ईसाई धर्म की लोकप्रियता का एक अहम कारण इसका लचीलापन है। 


ईसाई धर्म का इतिहास (History of Christianity in Hindi)
ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह का जन्म 6 ईं. पू. में हुआ था। अपने जीवन काल में ईसा मसीह ने ईसाई धर्म को दुनिया भर में फैलाने का सपना देखा। परमेश्वर और मानवता में उनके विश्वास को देखते हुए लोग उनके दिखाए राह पर चल निकले।


रोमन साम्राज्य की खिलाफत और ईसा मसीह का मसीहा बनना  
ईसाई धर्म में ईसा मसीह को परमेश्वर का पुत्र माना जाता है। ईसा मसीह के जन्म के समय यहूदी लोग रोमन साम्राज्य के अधीन थे और अपनी आजादी के लिए व्याकुल थे। लेकिन जल्द ही यहूदियों के जीवन में ईसा मसीह एक प्रकाश बन कर आएं। गरीबों की सहायता कर वह जल्द ही जनता के बीच लोकप्रिय हो गए। 


ईसा मसीह की मृत्यु (Death of Jesus)
लेकिन ईसा मसीह की लोकप्रियता के बाद जल्द ही उनके कुछ विरोधी भी सामने आए। यहूदियों की धर्मसभा ने उनपर पाखंड करने और खुद को भगवान का पुत्र बनाने का आरोप लगाकर मौत की सजा दी। उन्हें क्रॉस पर लटका दिया गया। 
अपनी मृत्यु के समय भी ईसा मसीह का मानवता से विश्वास नहीं डगमगाया और उन्होंने अपने अनुयायियों को संदेश दिया कि इन लोगों को (जिन्होंने ईसा मसीह को सजा दी) माफ करना, यह नहीं जानते कि यह क्या कर रहे हैं। 


ईसाई धर्म का फैलना
कहा जाता है कि ईसा मसीह मृत्यु के दो दिन बाद  जीवित हो उठे थे। इसके बाद उनके अनुयायियों ने फ़िलीस्तीन, रोम और यूरोप आदि जगहों पर ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार किया। 
ईसाई धर्म में भगवान
ईसाई धर्म के लोग ईश्वर को 'पिता' और ईसा मसीह को 'ईश्वर का पुत्र' और पवित्र आत्माओं को ईश्वर का दूत मानकर इनकी पूजा करते हैं। 


ईसाई धर्म के प्रमुख संप्रदाय 
ईसाई धर्म में बहुत से समुदाय हैं जैसे रोमन कैथोलिक, प्रोटैस्टैंट, आर्थोडोक्स, मॉरोनी, एवनजीलक आदि। इनमें से रोमन कैथोलिक संप्रदाय के लोग मानते हैं कि वेटिकन स्थित पोप ईसा मसीह के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी हैं। लेकिन प्रोटैस्टैंट संप्रदाय से जुड़े लोग पोप की सर्वोच्च शक्ति को नहीं मानते, उनका दृष्टिकोण बेहद उदार है। वह नियमों को समय के साथ बदलने पर जोर देते हैं।   

भारत  में  ईसाई  धर्म (Christianity​ in India)
कहा जाता है कि भारत में ईसाई धर्म का प्रचार संत टॉमस ने प्रथम शताब्दी में चेन्नई में आकर किया था। इसके बाद बड़े पैमाने पर भारत में ईसाई धर्म ने तब पांव पसारे जब मदर टेरेसा ने भारत आकर अपनी सेवाएं दी। 

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