gototop
raftaarLogoraftaarLogoM
Search
BG
close button


RaftaarLogo
sasas
Print PageSave as PDFSave as Image

नालंदाNalanda

नालंदा (Nalanda)

भारत के इतिहास में एक शैक्षिक राज्य के रूप में वर्णित हैं। दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय अपनी शैक्षिक योग्यताओं के कारण बेहद प्रसिद्ध था। नालंदा विश्वविद्यालय के साथ बौद्ध धर्म के कई तार भी जुड़े हैं। माना जाता है कि यहां भगवान बुद्ध बार-बार आएं थे। यही वजह है कि पांचवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच नालंदा को बौद्ध शिक्षा के केंद्र के रूप में भी जाना जाता था।

नालंदा का इतिहास (History of Nalanda)

नालंदा शहर की स्थापना पांचवीं शताब्दी में संस्कृत शब्द ‘नालंदा’ के नाम पर हुई थी। नालंदा का शाब्दिक अर्थ ‘ज्ञान देने वाला’ है।

कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान बुद्ध के बार-बार आने के कारण ही इसका धार्मिक महत्त्व बढ़ा। सम्राट अशोक तथा हर्षवर्धन ने यहां सबसे ज्यादा मठों, विहार तथा मंदिरों का निर्माण करवाया था।

नालंदा को ख्याति दिलाने में चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने अहम भूमिका निभाई, जिसने हज़ारों बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अपनाई गई अद्भुत व असाधारण शिक्षा प्रणाली के बारे में लिखा।

कई लोगों का मानना है कि नालंदा को कई बार बर्बाद किया गया। नालंदा विश्वविद्यालय को भी जला दिया गया था।

नालंदा की विशेषता (Importance of Nalanda)

नालंदा बौद्ध धार्मिक शिक्षाओं का केन्द्र है। इसके नजदीक ही बिहार शरीफ की दरगाह भी है, जहां हर साल “उर्स” का आयोजन किया जाता है। छठपर्व के दौरान भी यहां का माहौल देखने लायक होता है।

Raftaar.in