सिद्धांत

बौद्ध धर्म को समझने के लिए इस धर्म के मुख्य सिद्धांतों को समझना बेहद जरूरी है। गौतम बुद्ध द्वारा स्थापित बौद्ध धर्म व्यवहार, आदर्श और बेहतर मानव जीवन की और अग्रसर रहता है। बौद्ध धर्म जिन चार मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है वह निम्न हैं:

प्रतीत्यसमुत्पाद (Prtitysmutpad)

प्रतीत्यसमुत्पाद का अर्थ है कामों या कर्मों की शृंखला। इस सिद्धांत के अनुसार यह संसार अनंत कर्मों पर ही टिका है। यह कर्म कभी खत्म नहीं होगे क्योंकि यह शुरू ही नहीं हुए हैं। यह सिद्धांत हिन्दू धर्म की प्रमुख धार्मिक पुस्तक "गीता" में दिए गए कर्मों के महत्त्व से मिलता-जुलता है। जो इंसान कर्मों के फेर को समझ जाता है और इनसे ऊपर उठ कर कार्य करता है उसे निर्वाण (मोक्ष) अवश्य प्राप्त होता है।

चार आर्य सत्य (Four Aryan Truths)

चार आर्य सत्य ही बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का मुख्य केन्द्र है। इन चार सत्यों को समझ पाना बेहद आसान है। यह मानव जीवन से जुड़े बेहद आम बातें हैं जिनके पीछे छुपे गूढ़ रहस्यों को हम कभी समझ नहीं पाते। यह चार सत्य निम्न हैं:

* दुख: जीवन का अर्थ ही दुख है। जन्म लेने से लेकर मृत्यु तक मनुष्य को कई चरणों में दुख भोगना पड़ता है।

* दुख का कारण चाहत: मनुष्य के सभी दुखों का कारण उसका कार्य, व्यक्ति या मोह के प्रति लगाव या चाहत ही है।

* दुखों का अंत संभव है: कई बार मनुष्य अपने दुखों से इतना परेशान हो जाता है कि आत्म हत्या जैसे कदम भी उठा लेता है। मनुष्य को यह समझना चाहिए कि उसके दुखों का अंत संभव है।

* दुखों के निवारण का मार्ग: अष्टांगिक मार्ग ही मनुष्य के समस्त दुखों के निवारण का मार्ग है। इस मार्ग पर चल मनुष्य अपने समस्त दुखों से पार पा सकता है।

आर्य अष्टांग मार्ग (Arya Ashtanga Marg)

बौद्ध धर्म के अनुसार दुखों के निवारण का मार्ग अष्टांग मार्ग है जो आठ प्रमुख कार्य भी कहे जा सकते हैं। बौद्ध धर्म के अनुसार मनुष्य को इन मार्गों का अनुसरण करना चाहिए:

१. सम्यक या उचित दृष्टि
२. पूर्ण संकल्प
३. उचित वचन
४. उचित कर्म
५. सम्यक जीविका
६. पूर्ण प्रयास
७. उचित स्मृति
८. सम्यक समाधि

बोधी (Bodhi)

भगवान गौतम बुद्ध से प्राप्त शिक्षाओं को ही बोधी कहा जाता है। मान्यतानुसार इस ज्ञान को प्राप्त कर ही मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है। बोधी के तीन स्तर होते हैं: श्रावकबोधि, प्रत्येकबोधि और सम्यकसंबोधि।

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